ये सारे फ़ैसले कहीं न कहीं ये इशारा भी करते हैं कि सऊदी अरब का आर्थिक मॉडल ख़तरे में हैं. सऊदी अरब को भारत जैसे सहयोगी देशों की ज़रूरत है.
हमें इस पर ध्यान देना चाहिए कि अगस्त में अनुच्छेद 370 ख़त्म किए जाने के
फ़ैसले के महज एक हफ़्ते के भीतर भारत ने सऊदी अरब में निवेश का ऐलान किया था.
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) ने अपने 'ऑयल-केमिकल' कारोबार का 20 फ़ीसदी शेयर सऊदी अरब की कंपनी अरामको को बेचने का फ़ैसला किया था.
इसकी क़ीमत 75 अरब डॉलर है और यह सऊदी अरब में होने वाला अब तक के सबसे
बड़े विदेशी निवेशों (FDI) में से एक है.
भारत और सऊदी अरब दोनों ही
वैश्विक और क्षेत्रीय संकट के दौर में अपनी विदेश नीति और प्राथमिकताओं को
नई परिभाषा दे रहे हैं. भारत के लिए सऊदी अरब और खाड़ी देश मध्य-पूर्व के
प्रमुख आकर्षण बन रहे हैं.
वहीं, सऊदी अरब के लिए भारत विश्व की आठ बड़ी शक्तियों में से एक है, जिसके साथ वो अपने 'विज़न 2030' के तहत रणनीतिक साझेदारी करना चाहता है. इसलिए अगर भारत और सऊदी अरब के रिश्तों
में नई ऊर्जा आती दिख रही है तो इसे लेकर हैरान नहीं होना चाहिए.
एसडीएफ़ के एक सीनियर कमांडर ने दावा किया है कि सीरिया में अमरीकी ऑपरेशन से पहले इस्लामिक स्टेट नेता के लोकेशन पता करने में उनके सूत्रों
की अहम भूमिका थी.
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा
था कि अमरीका की रेड के दौरान अबु बक्र अल-बग़दादी ने ख़ुद को उड़ा लिया
था. ट्रंप ने इस ऑपरेशन में कुर्दों की भूमिका की बहुत अहमियत नहीं बताई थी.
अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था, ''उनकी जानकारी से हमें मदद मिली लेकिन सैन्य कार्रवाई में उनकी कोई भूमिका नहीं थी.''
लेकिन
एसडीएफ़ के सीनियर नेता पोलाट कैन ने ज़ोर देकर कहा है कि बग़दादी के ख़िलाफ अमरीकी ऑपरेशन में एसडीएफ़ की बड़ी भूमिका थी. पोलाट ने सोमवार को
इसे लेकर ट्विटर पर कई ट्वीट किए हैं.
पोलाट ने लिखा है, ''बग़दादी को लेकर और उसके ठिकाने की पहचान से जुड़ी हमने अहम सूचनाएं दी थीं. हमारे ख़ुफ़िया सूत्र ऑपरेशन ख़त्म होने तक
अमरीकी बलों के साथ जुड़े रहे थे. एसडीएफ़ 15 मई से बग़दादी को लेकर सीआईए
के साथ काम कर रहा था. हमने ही पता किया कि बग़दादी का वर्तमान ठिकाना सीरिया का इदलिब प्रांत है.''
इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में एसडीएफ़ अमरीका का मुख्य सहयोगी रहा है लेकिन अमरीका ने इसी महीने उत्तरी
सीरिया से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था. विश्लेषकों का मानना है कि
अमरीकी सैनिकों की वापसी के चलते ही तुर्की को उत्तरी सीरिया में कुर्द
बलों के ख़िलाफ़ हमले का मौक़ा मिला.
सीरिया में मौजूद अपने सहयोगियों और बाक़ी के देशों को अमरीका ने पहले ही इस रेड की सूचना दे दी
थी. अमरीका ने जिन्हें बग़दादी के ख़िलाफ़ ऑपरेशन की सूचना दी थी वो हैं-
तुर्की, इराक़, उत्तरी सीरिया में मौजूद कुर्दिश बल और रूस. इदलिब के हवाई
क्षेत्र पर इन्हीं का नियंत्रण है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमरीकी सैनिकों के हेलिकॉप्टर गोलीबारी करते हुए
ठिकाने पर उतरे थे. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमरीकी बलों के बग़दादी के परिसर में आने के बाद वो सुरंग में भाग गया था ताकि सरेंडर न करना पड़ा.
ट्रंप
ने कहा था कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियां बग़दादी का पहले से ही पीछा कर रही थीं और उन्हें पता था कि बग़दादी जहां है वहां कई सुरंगे हैं. इनमें से
ज़्यादातर सुरंगों का कोई एग्ज़िट नहीं था.
ट्रंप ने कहा था कि
बग़दादी सुरंग में भागने लगा और उस सुरंग का कोई एग्ज़िट नहीं था. ट्रंप ने कहा था कि इस दौरान बग़दादी गिड़गिड़ा और रो रहा था.
अमरीकी
राष्ट्रपति ने कहा, ''पहले पूरे कंपाउंड को ख़ाली कराया गया. या तो लोगों
ने सरेंडर किया या फिर मारे गए. 11 बच्चों को बाहर निकाला गया. उस सुरंग में अकेला बग़दादी बच गया था. वो अपने साथ तीन बच्चों को लेकर भाग रहा था
और उनकी भी मौत हो गई.''
ट्रंप ने कहा था, ''वो सुरंग के आख़िरी छोर पर पहुंच गया. हमारे कुत्ते उसे खदेड़ रहे थे. आख़िर में वो गिर गया और कमर
में बंधे विस्फोटक से ख़ुद को और तीन बच्चों को उड़ा लिया. ब्लास्ट के बाद
उसकी बॉडी टुकड़ों में बँट गई थी. धमाके में सुरंग भी तबाह हो गया.''
रिपोर्ट में कहा गया है कि वहीं डीनएन जांच के बाद पुष्टि की गई कि सुरंग में जिस व्यक्ति ने ख़ुद को उड़ाया वो बग़दादी ही था.
डेली बीस्ट के अनुसार कंबाइंड फेशियल रिकॉगनिशन टेक्नॉलजी और डीएनए रेडार के ज़रिए मौक़े पर ही शव की पहचान की जा सकती है.
बग़दादी के शव के कुछ हिस्सों को टेक्नीशियन हेलिकॉप्टर में साथ लेकर आए थे.
सोमवार को यूएस जॉइंट चीफ़्स ऑफ स्टाफ जनरल माइक मिली ने बॉडी की अंत्येष्टि को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी थी.
हालांकि
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कुछ सूत्रों ने बताया था कि इस्लामिक रिवाज़ के
हिसाब से अंत्येष्टि की गई थी. 2011 में अल-क़ायदा के संस्थापक ओसामा बिन-लादेन के साथ भी ऐसा ही किया गया था.
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