एक अन्य वकील अमरनाथ पांडेय का कहना है कि इस मामले में सरकार को चाहिए
कि वह तत्काल दोषियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ करे और दोषियों की
गिरफ़्तारी करे.
अमरनाथ पांडेय कहते हैं, "यह ऐसा मामला नहीं है कि
विधानसभा के पटल पर रखने के बाद सरकार के स्व-विवेक पर निर्भर करता हो कि वह कार्रवाई करे या ना करे. यह 17 आदिवासियों की साफ़-साफ़ हत्या का मामला
है और सरकार को कार्रवाई करनी ही होगी."
राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दावा है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होगी.
असल
में जून 2012 में जब यह घटना हुई थी, तब कांग्रेस पार्टी ने अपनी एक जांच टीम बना कर इस मामले की जांच की थी और घटना को फर्ज़ी मुठभेड़ करार देते
हुये इसे 'जनसंहार' बताया था.
केंद्र में कांग्रेस पार्टी द्वारा
सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई की सराहना के बीच, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस
पार्टी ने राज्य की भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के इस्तीफ़े की मांग की थी.
मुख्यमंत्री कहते
हैं, "साल 2012 के बाद 2019 में यह जांच रिपोर्ट आई है. इसे पटल पर रखा गया
है. 17-17 निर्दोष आदिवासी मारे गये हैं और इसके लिये जो भी ज़िम्मेदार हैं, उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी. इस मामले में किसी को बख़्शने का
सवाल ही नहीं उठता."
घटना के तुरंत बाद बनाई गई कांग्रेस पार्टी की जांच कमेटी के अध्यक्ष
कवासी लखमा अब छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री हैं. उनका कहना है कि इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के ख़िलाफ़ तत्काल एफ़आईआर दर्ज़ की
जानी चाहिए.
लेकिन भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
धरमलाल कौशिक जांच आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किये जाने से पहले ही उसके कुछ अंश मीडिया में सार्वजनिक किये जाने को बड़ा मुद्दा मानते हैं.
सोमवार को भाजपा ने विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लाने का प्रयास किया.
धरमलाल कौशिक कहते हैं, "पटल पर न रख कर के, जो ये समाचार पत्रों में छपा है,
निश्चित रुप से विधानसभा की अवमानना है और लगातार विधानसभा की अवमानना हो
रही है."
विधानसभा का सत्र सोमवार को समय से पहले, स्थानीय निकाय के चुनाव का हवाला देकर ख़त्म कर दिया गया और मंगलवार से नेता चुनावी राजनीति में जुट
जाएंगे.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस पार्टी से जुड़े आदिवासी नेता अरविंद नेताम कहते हैं, "राजनीति ज़रुर हो लेकिन आदिवासी मुद्दों को
हाशिये पर नहीं डाला जाना चाहिये."
"सरकार किसी की भी हो, बस्तर में आदिवासियों का विश्वास हासिल करने की कोशिश किसी ने आज तक नहीं की.
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने सरकार को एक अवसर दिया है."
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