Monday, October 8, 2018

तबाबी ने रजत जीता, ओलिंपिक स्तर पर पदक जीतने वाली पहली जुडोका बनीं

ब्यूनस आयर्स. थांगजाम तबाबी देवी ओलिंपिक स्तर पर जूडो में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं हैं। उन्होंने तीसरे यूथ ओलिंपिक में यहां महिलाओं की 44 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। इस वर्ग का स्वर्ण पदक वेनेजुएला की मारिया गिमिनेज ने हासिल किया। मारिया ने फाइनल में मणिपुर की रहने वाली तबाबी को 10-0 से हराया। तबाबी कैडेट वर्ग में एशियाई चैम्पियन रह चुकी हैं।
भारत अब तक ओलिंपिक स्तर पर सीनियर या जूनियर स्तर पर जूडो में कभी भी पदक नहीं जीत पाया था। 16 साल की तबाबी ने सेमीफाइनल में क्रोएशिया की एना विक्तोरिजा पुलजिज को 10-0 से हराया था।
इससे पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में भूटान की यांगचेन वांगमो को 10-0 से हराकर आखिरी आठ में जगह बनाई थी। क्वार्टर फाइनल में तबाबी ने कोसोवो की इरजा मुमिनोविक को हराया था।
भारत के इस यूथ ओलिंपिक गेम्स में अब दो पदक हो गए हैं। इस टूर्नामेंट में भारत को पहला पदक तुषार माने ने दिलाया था। उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में रजत पदक जीता था।
राष्ट्रीय चैम्पियन श्रीहरि नटराज पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक फाइनल के लिए क्लालिफाई नहीं कर पाए। वे क्ववालिफाइंग के सेमी में नौवें स्थान पर रहे, जबकि शीर्ष आठ स्थान पर रहने वाले ही फाइनल में पहुंचते हैं। नटराज ने 56.48 सेकंड का समय निकाला। यह उनकी हीट की टाइमिंग 56.75 सेकंड से बेहतर था।
नटराज ने 56.48 सेकंड का समय निकाला। यह उनकी हीट की टाइमिंग 56.75 सेकंड से बेहतर था। भारत की ओर इस यूथ ओलिंपिक में 47 एथलीट्स भाग ले रहे हैं। यह अब तक का उसका सबसे बड़ा दल है।फुटबॉल के प्रतिष्ठित अवॉर्ड बेलेन डि ओर के लिए नामित 15 खिलाड़ियों की सूची जारी कर दी गई है। अर्जेंटीना और बार्सिलोना के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी को इसमें जगह नहीं मिली है। अभी 15 और खिलाड़ियों के नाम शामिल होने बाकी हैं। रियल मैड्रिड के गारेथ बेल और मैनचेस्टर सिटी के केविन डी ब्रुएन इसमें शामिल हैं।

युवेंटस और पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी जगह बनाने में सफल रहे हैं। बेल ने लिवरपूल के खिलाफ चैंपियंस लीग के फाइनल में दो गोल किए थे। बेल्जियम के डी ब्रुएन को अपने क्लब को ईपीएल चैंपियन बनाने और देश की टीम को वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल तक पहुंचाने के लिए शामिल किया गया है।

नामित खिलाड़ी: गारेथ बेल, केविन डी ब्रुएन, सर्जियो एगुएरो, एलिसन बेकर, करीम बेंजेमा, एडिनसन कवानी, थिबोत कोर्टोइस, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, रॉबर्टो फरमिनो, एंटोनियो ग्रिजमैन, इस्को, इडेन हजार्ड, हैरी केन, एनगोलो कान्टे और डिएगो गोडिन।
ब्यूनस आयर्स. तुषार साहू माने के 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत जीतने के बाद भारत की महिला राइफल निशानेबाज मेहुली घोष ने यहां यूथ ओलिंपिक गेम्स में सोमवार को सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वे ओलिंपिक स्तर पर पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बन गईं। मेहुली से पहले ओलिंपिक में सीनियर या जूनियर किसी भी स्तर पर कोई भी भारतीय महिला शूटर पदक नहीं जीत पाई थी। मेहुली के रजत पदक जीतने पर ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले और इकलौते भारतीय अभिनव बिंद्रा ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी।
मेहुली मामूली अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं। उन्होंने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के फाइनल में 24वें और आखिरी शॉट पर 9 का स्कोर किया। इसी कारण उनके हाथ से स्वर्ण पदक निकल गया।
भारतीय निशानेबाज ने 248 के स्कोर के साथ रजत जीता, जबकि डेनमार्क की स्टेफनी ग्रैंसोई ने 248.7 के स्कोर के साथ स्वर्ण जीता। भारत का इन खेलों की निशानेबाजी में यह दूसरा रजत है। मेहुली ने क्वालिफाइंग में 628.8 के स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया था।
मेहुली ने फाइनल में 22वें शॉट पर 10.7 का स्कोर किया और 0.8 की बढ़त बना ली। आखिरी शॉट के समय उनके पास 0.6 की बढ़त थी। मेहुली का आखिरी शॉट 9.1 था, जबकि स्टेफनी का आखिरी शॉट 10.4 था। इसी कारण मेहुली को रजत से संतोष करना पड़ गया।

Wednesday, September 26, 2018

बच्चे के साथ दोहा से हैदराबाद जा रहे थे माता-पिता, उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि लैंड करने से

शनल डेस्क, नई दिल्ली. दोहा से हैदराबाद आ रही कतर एयरवेज की फ्लाइट में बुधवार को एक 11 महीने के बच्चे की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, बच्चे को बीच रास्ते में ही सांस की परेशानी हो गई थी। फ्लाइट के हैदराबाद लैंड होते ही बच्चे के माता-पिता उसे अपोलो मेडिकल सेंटर ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे का नाम अरनव वर्मा अल्लूरी बताया गया है।

- कतर एयरवेज ने अपने बयान में कहा- 'हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आज सुबह बच्चे के निधन की खबर दुखद है। बच्चे के परिवार के लिए हमारी संवेदनाएं।' पुलिस ने बच्चे की मौत की जो वजह बताई, उसपर माता-पिता भरोसा नहीं कर पा रहे थे। नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. राजधानी के अशोक विहार इलाके में बुधवार को तीन मंजिला इमारत ढह गई। हादसा स्वर्ण पार्क के पास हुआ। यहां कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ की दो टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। अब तक नौ लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है।
नेशनल डेस्क। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की रहने वाली रूबी आज करोड़ों महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं। बच्चा होने के बाद चेन्नई की रहने वाली हाउसवाइफ रूबी का वजन बेहद बढ़ गया था। बच्चा अब छह साल का हो चुका था। बढ़ते वजन पर रूबी के पति ने भी उन्हें ताने मारने शुरू कर दिए। रूबी ने बढ़ते वजन को चुनौती की तरह लिया। रूबी ने मीडिया से बातचीत में बताया,” मेरे पति ने मुझसे कहा कि वह मेरे वजन के कारण मुझमें रुचि खो रहे हैं। तब मुझे अहसास हुआ कि अपनी फिटनेस का ख्‍याल रखना है। इसके बाद मैंने पैदल चलना शुरू किया, जिससे मैंने अपना का
नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ आधार को मान्यता दी। कोर्ट के मुताबिक मोबाइल को आधार से लिंक करना जरूरी नहीं है वहीं आधार को बैंक से लिंक करना भी जरूरी नहीं है। इससे पहले कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में SC/ST आरक्षण पर भी फैसला सुनाया। कोर्ट ने 2006 में दिए अपने फैसले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस मामले को राज्यों पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारें चाहे तो वे प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं।
आधार पर कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें :
कहां जरूरी नहीं-
# मोबाइल को आधार से लिंक करना जरूरी नहीं है।
# आधार को बैंक से लिंक करना भी जरूरी नहीं है।
# स्कूलों में आधार लिंक करना जरूरी नहीं है।
# CBSE, NEET और UGC आधार लिंक जरूरी नहीं कर सकते हैं।
# प्राइवेट कंपनियां आधार नहीं मांग सकती हैं।
कहां जरूरी-
# आयकर दाखिल करने में आधार जरूरी।
# पैन कार्ड के लिए आधार देना होगा।
# सरकारी योजनाओं में लाभ लेने के लिए आधार जरूरी।
फी वजन कम लिया। रूबी को मिसेज चेन्नई का पुरस्कार भी जीत चुकी हैं।
नेशनल डेस्क। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की रहने वाली रूबी आज करोड़ों महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं। बच्चा होने के बाद चेन्नई की रहने वाली हाउसवाइफ रूबी का वजन बेहद बढ़ गया था। बच्चा अब छह साल का हो चुका था। बढ़ते वजन पर रूबी के पति ने भी उन्हें ताने मारने शुरू कर दिए। रूबी ने बढ़ते वजन को चुनौती की तरह लिया। रूबी ने मीडिया से बातचीत में बताया,” मेरे पति ने मुझसे कहा कि वह मेरे वजन के कारण मुझमें रुचि खो रहे हैं। तब मुझे अहसास हुआ कि अपनी फिटनेस का ख्‍याल रखना है। इसके बाद मैंने पैदल चलना शुरू किया, जिससे मैंने अपना काफी वजन कम लिया। रूबी को मिसेज चेन्नई का पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 'आधार' पर सुनाया बड़ा फैसला, कुछ शर्तों के साथ दी मान्यता, जानिए आधार कहां जरूरी होगा और कहां नहीं

Monday, September 10, 2018

राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई चाहता है तमिलनाडु

मिलनाडु की ई पलनीसामी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में दोषी ठहराए गए सात लोगों को रिहा कराने के लिए प्रस्ताव पास किया है.
राज्य की कैबिनेट इस दोषियों को रिहा करने की सिफ़ारिश राज्यपाल के पास भेजेगी. ये सातों दोषी पिछले 27 सालों से जेल में बंद हैं.
2014 में प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने इनकी रिहाई का फ़ैसला किया था पर केंद्र सरकार ने इसे ख़ारिज कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने सातों दोषियों की रिहाई पर राज्यपाल को फ़ैसला लेने के लिए कहा था. राज्य सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर ही प्रस्ताव पास किया गया है.
राजीव गांधी की हत्या धानु नाम की एक आत्माघाती महिला हमलावर ने की थी. वो महिला एलटीटीई की सदस्य थी. एलटीटीई सशस्त्र विद्रोही समूह था जो श्रीलंका में तमिलों के लिए एक अलग देश की मांग कर रहा था.
तमिलनाडु के मतस्य पालन मंत्री डी जयकुमार ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा, ''हमलोग ने फ़ैसला किया है कि सातों दोषियों की रिहाई के लिए राज्यपाल के पास सिफ़ारिश भेजेंगे. यह सिफ़ारिश संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत भेजी जाएगी. राज्यपाल इसे स्वीकार करेंगे क्योंकि उनके पास कोई विक्लप नहीं होगा.''
शुरुआत में राजीव गांधी की हत्या में 26 लोगों को फांसी की सज़ा मिली थी. बाद में कइयों की मौत की सज़ा आजीवन क़ैद में तब्दील हो गई थी. इस मामले में राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और बेटे राहुल गांधी ने भी मौत की सज़ा को आजीवन क़ैद में तब्दील करने में मदद की थी.
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती हमलावरों ने हत्या कर दी थी.
ये हत्यारे श्रीलंका से आए थे. तभी से इंसाफ़ का पहिया आहिस्ता-आहिस्ता घूमता रहा है. इस मामले में जिन्हें सज़ा सुनाई गई, वे 27 साल से सलाखों की पीछे हैं.
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य के विंडसर शहर में रहने वाली 33 साल की एलिज़ाबेथ ब्रूक और उनके 32 वर्षीय पति एडम ब्रूक इस बात से बेहद खुश हैं कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ अडॉप्शन प्रोग्राम (गोद लेने का कार्यक्रम) दोबारा शुरू करने की सिफ़ारिश की है.
एलिज़ाबेथ जब 14 साल की थीं तब उन्हें पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो गया था. इस बीमारी की वजह से एलिज़ाबेथ कभी गर्भधारण नहीं कर सकतीं.
वे कहती हैं, ''इस कार्यक्रम ने हमारे लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है, हम अपना परिवार शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं.''
यह एक इत्तेफ़ाक ही है कि जब एलिज़ाबेथ को अपने प्रजनन के बारे में जानकारी मिली, उसी समय उन्होंने टीवी पर बॉलीवुड फ़िल्म राजा हिंदुस्तानी देखी थी.
एलिज़ाबेथ कहती हैं, ''उस फ़िल्म ने मेरे दिमाग में भारत की एक अलग ही छवि बना दी. मुझे भारतीय खाना, कपड़े और फ़िल्में पसंद आने लगा. उसके बाद मैं अपनी बहन के साथ भारत गई, फिर अपने पति एडम के साथ भी दो बार भारत गई. हमने तय किया था कि हम भारत से एक बच्चा गोद लेंगे.''
अक्टूबर 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ चलने वाले अडॉप्शन प्रोग्राम पर रोक लगा दी थी. दरअसल उस समय ऐसे आरोप लगे थे कि इस इंटर-कंट्री अडॉप्शन प्रोग्राम के तहत बच्चों की तस्करी हो रही है. इस तस्करी के पीछे भारत की कुछ जानी मानी कंपनियों का नाम सामने आया था.
इसके बाद भारत ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 और अडॉप्शन रेग्युलेशन 2017 के तहत भारत में दूसरे देशों के नागरिकों के लिए बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में सख्त कर दिया.
एलिज़ाबेथ का परिवार काफ़ी उदार विचारधारा वाला रहा है और वे अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के बीच बड़ी हुई हैं. एलिज़ाबेथ कहती हैं, ''ऑस्ट्रेलिया में भारत का बच्चा गोद लेने वाला कार्यक्रम शायद इस साल के अंत तक शुरू हो जाए, अगर सबकुछ ठीक से होता है तो आने वाले तीन साल में हमारे पास बच्चा होगा.''
ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड वेलफ़ेयर (एआईएचडब्ल्यू) की 2016-17 की रिपोर्ट के अनुसार किसी जोड़े के लिए दूसरे देश का बच्चा गोद लेने में औसतन 2 साल 9 महीने तक का वक़्त लगता है.
एलिज़ाबेथ और एडम ने भारत की सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स ऑथोरिटी (सीएआरए) की तत्काल प्लेसमेंट श्रेणी के तहत दो या तीन बच्चों को गोद लेने के बारे में सोचा है.
वैसे तो ऑस्ट्रेलिया-भारत इंटरकंट्री अडॉप्शन प्रोग्राम दोबारा शुरू होने को है लेकिन इस बीच ऑस्ट्रेलिया में सोशल सर्विस विभाग के प्रवक्ता ने बताया है कि इस कार्यक्रम के तहत अभी कोई अपील दर्ज़ नहीं की जा रही है.
प्रवक्ता के अनुसार, ''फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन को इस कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने के लिए एक नई प्रक्रिया का गठन करना होगा, इसमें अभी थोड़ा वक़्त लगेगा. तभी भारत के पास यहां से बच्चा गोद लेने के आवेदनों को भेजा जा सकेगा. कोई भी कार्यक्रम जिसे दोबारा शुरू किया जाता है उस पर प्रशासन अपनी कड़ी नज़र रखता है ताकि कहीं कोई गड़बड़ी ना हो जाए.''

Wednesday, September 5, 2018

छेड़छाड़, प्रताड़ना और पाबंदी... कैंपस हुआ ठप

त्तीसगढ़ के हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में हफ़्ते भर से 'आज़ादी' के नारे गूंज रहे हैं.
यूनिवर्सिटी में पढ़ाई-लिखाई और परीक्षा स्थगित है और 'पिंजरा तोड़ो' की मांग करते हुए सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की सीढ़ियों पर जमे हुए हैं.
इनकी मांग है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को 24 घंटे कैंपस के भीतर कहीं भी आने-जाने की छूट मिले. इसके अलावा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी भी 24 घंटे खुली रखी जाए. साथ ही विश्वविद्यालय के कार्य परिषद की बैठकों की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए.
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली लड़कियों की यौन प्रताड़ना के लिये जिम्मेवार शिक्षकों को जांच तक निलंबित रखा जाए.
मांगों की एक लंबी फ़ेहरिश्त है और आरोप हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन इन मांगों को अनसुना कर रहा है. लेकिन विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा इन आरोपों से इंकार कर रहे हैं.
शर्मा कहते हैं, "प्रदर्शनकारी छात्र अपनी 17 मांगों को लेकर हमारे पास आए थे और हमने उसी समय 15 मांगों को पूरी तरह से मान लिया था. विश्वविद्यालय में लड़कियों या लड़कों के हॉस्टल और कैंपस को रात भर खुला रखने के मुद्दों पर भी मैंने यही कहा है कि यह नीतिगत मामला है और सुरक्षा समेत तमाम मुद्दों पर विचार करने के बाद ही फ़ैसला लिया जा सकता है."
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और भारत के उपराष्ट्रपति रहे मोहम्मद हिदायतुल्ला की स्मृति में साल 2003 में स्थापित इस आवासीय विश्वविद्यालय में एलएलबी ऑनर्स और एलएलएम की पढ़ाई होती है.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर इस विश्वविद्यालय के कैंपस में लड़के और लड़कियों के हॉस्टल भी हैं, जहां देश भर के चयनित छात्र रहते हैं.
शुरू से ही अलग-अलग विवादों में घिरे इस विश्वविद्यालय में ताज़ा विवाद की शुरुआत 27 अगस्त को हुई, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर डॉक्टर सुखपाल सिंह की दोबारा नियुक्ति को अवैध मानते हुए उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया.
डॉक्टर सुखपाल सिंह के दूसरे कार्यकाल की नियुक्ति को विश्वविद्यालय के ही एक प्रोफ़ेसर अविनाश सामल ने चुनौती दी थी.
जिस दिन हाईकोर्ट का फ़ैसला आया, उसी शाम विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित लड़कियों के हॉस्टल के गेट पर रात साढ़े दस बजे के बाद ताला बंद करने पर प्रदर्शन शुरू हो गया.
रात भर प्रदर्शन चला और फिर अगले दिन प्रदर्शन के साथ कुछ और मांगें जुड़ती चली गईं.
दो दिन बाद राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में विधि विभाग के प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा को प्रभारी कुलपति बनाया. शर्मा की छात्रों से बातचीत भी हुई, लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे.
इस पूरे विवाद पर विश्वविद्यालय में स्टूडेंट बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष स्वाति भार्गव कहती हैं, "हमने पिछले साल भी छात्रों के हक़ में कुछ मुद्दे उठाए थे. उस समय हमारी मांगों पर विचार करने की बात कही गई थी. लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसलिए इस बार हमने तय किया कि जब तक हमारी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे."
स्टूडेंट बार एसोसिएशन के उप संयोजक आकांश जैन का दावा है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और एक भी मामले में कोई कार्रवाई होती नज़र नहीं आई. प्रभारी कुलपति ने हमारी मांगों को सुना ज़रूर, लेकिन पिछले सात दिनों में कोई भी मांग पूरी नहीं हुई.
इमेज कॉपीरइट  क्षिण भारत की एक छात्रा ने बताया कि उन्हें शिक्षक ने अपने सामने नाच कर दिखाने पर पांच दिन की उपस्थिति यूं ही दर्ज करने का प्रलोभन दिया. एक अन्य छात्रा ने अपने शिक्षक पर परीक्षा में पास करने के बदले अपने कमरे में बुलाने का आरोप लगाया.एक अन्य छात्रा ने कहा, "एक शिक्षक की बात नहीं मानने पर मेरे घर आधी रात को फ़ोन कर कह दिया गया कि मैं रात को बाहर घूमती हूं, शराब पीती हूं, ड्रग्स की आदि हूं. मेरे पिता को कहा गया कि वो मुझे यहां से ले जाएं. ईश्वर का धन्यवाद है कि मेरे माता-पिता मुझ पर भरोसा करते हैं. लेकिन क्या यह मानसिक प्रताड़ना किसी को भी अवसाद में डालने के लिए काफ़ी नहीं है?"
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा मानते हैं कि ऐसी शिकायतें उनके सामने आई थीं और प्रदर्शनकारी छात्र सार्वजनिक तौर पर ऐसी शिकायतों पर बात करना चाह रहे थे.
शर्मा के अनुसार, ''मैंने छात्रों को पीड़ित छात्राओं के नाम सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया और उनसे कहा कि जो भी मामले हैं, उसकी लिखित में जानकारी दी जाए जिससे कार्रवाई की जा सके. लेकिन मुझे अब तक एक भी शिकायत नहीं मिली है."
हालांकि विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा इससे इंकार करते हैं. वे कहते हैं, "हमने 17 में से 15 मांगें मान ली हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए थोड़ा समय तो चाहिए. कैंपस को 24 घंटे खुला रखने के मुद्दे पर भी हमने कार्य परिषद में बात रखने का आश्वासन दिया था. लेकिन जाने क्यों छात्र अड़े हुए हैं. "
विश्वविद्यालय में स्टूडेंट बार एसोसिएशन के प्रचार-प्रसार प्रभारी अच्युत तिवारी का कहना है कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्राओं ने यौन प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. पिछले दो दिनों में 76 लड़कियों ने लिखित में अपनी शिकायत दर्ज कराई है.
अच्युत तिवारी कहते हैं, "जब शिक्षक लड़कियों को प्रताड़ित कर रहे हैं, तब आप लड़कियों से यह अपेक्षा कैसे रख सकते हैं कि वे उनकी कक्षा में बैठ कर पढ़ाई करें? हम चाहते हैं कि इस तरह के तमाम मामलों की जांच हो और जांच पूरी होने तक आरोपी शिक्षकों को निलंबित किया जाए."
एक छात्रा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मेरे शिक्षक मेरे कपड़ों को लेकर, परफ़्यूम को लेकर, शैंपू को लेकर क्लास रूम में टिप्पणी करते रहे हैं. मुझे बार-बार कहा गया कि मैं केवल उन पर भरोसा करूं, उनके कमरे में अकेले आऊं. मेरे सहपाठी के साथ बैठने पर कहा गया कि तुम दोनों के बीच क्या रिश्ता है, क्या शादी करने वाले हो?"

Monday, September 3, 2018

यूजर्स के लिए खुशखबरी, अब मिलेगा भाषाओं का सटीक अनुवाद

फेसबुक में रिसर्चर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए कम संसाधनों वाली भाषाएं जैसे ऊर्दू और बर्मी के सरल और सटीक अनुवाद का तरीका विकसित किया है. एक जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से मिली है.
फोर्ब्स के मुताबिक, महत्वपूर्ण खोज को एम्पिरिकल मेथड्स इन नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग या  में पेश किया जाएगा. फेसबुक के लिए ये खोज महत्वपूर्ण साबित हो सकता है क्योंकि सोशल मीडिया कंपनी दुनिया भर में यूजरों को उनकी पसंदीदा भाषा में पोस्ट पढ़ने में मदद के लिए ऑटोमैटिक लैंग्वेज ट्रांसलेशन का इस्तेमाल करती है.
मौजूदा मशीनी अनुवाद प्रणाली कुछ भाषाओं में इंसानी स्तर के प्रदर्शन को हासिल कर सकती है, लेकिन उसके पास सीखने के लिए विभिन्न भाषाओं में एक ही वाक्य का अपार संग्रह होना चाहिए.
फेसबुक AI रिसर्च (FAIR) डिवीजन की टीम मशीन ट्रांसलेशन (MT) सिस्टम को ट्रेनिंग देने में कामयाब रही है. इसमें विकिपीडिया जैसी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वेबसाइट्स से विभिन्न भाषाओं के विभिन्न टेक्स्ट को फीड किया गया है. सबसे अहम यह है कि ये वाक्य एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं.
फेयर के पेरिस रिसर्च लैब के प्रमुख और शोधकर्मी एंटनी बोर्डस ने कहा कि एक समानांतर संग्रह तैयार करना बहुत जटिल काम है क्योंकि इसके लिए दोनों भाषाओं में पारंगत लोगों की जरूरत होती है. मसलन, पुर्तगाली/नेपाली का समानांतर संग्रह तैयार करने के लिए इन दोनों भाषाओं में पारंगत लोगों की जरूरत होती है और यह बेहद कठिन काम है. श के कई हिस्सों में बाढ़ और बारिश से हाहाकार मचा हुआ है. अभी तक देश के दक्षिणी हिस्से से लगातार दिल दहलाने वाली खबरें आ रही थीं, लेकिन अब उत्तरी राज्यों में भी कुदरत ने अपना रुख बदला है.
उत्तराखंड के मसूरी से रविवार को भारी बारिश से हाहाकार मचा गया. राज्य के मसूरी में केम्पटी वाटरफॉल के पानी ने प्रलय का रूप अख्त‍ियार कर लिया. स्थानीय लोगों की मदद से पर्यटकों वहां से बाहर निकाला गया. इस दौरान वाटरफॉल के आसपास की दुकानों में पानी भर गया. सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने केम्पटी फॉल का रास्ता बंद कर दिया है.
सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि असम, अरुणाचल के बाद काफी लंबे समय तक हुई बारिश के कारण सड़कें तालाब में बदल गईं. उत्तर प्रदेश के शामली में एक तस्वीर सामने आई जहां अंडरपास में कई घंटों तक ट्रैक्टर समेत अन्य कई वाहन फंसे रह गए. यूपी के ही ललितपुर में बेतवा नदी पर ईरेक बांध के पास करीब 8 मछुआरे फंस गए. वायुसेना ने वहां जाकर रेस्क्यू किया.
प्रदेश में जानलेवा बनी बारिश की वजह से 16 लोगों की मौत हो गई तथा 12 अन्य जख्मी हो गए हैं. राहत आयुक्त कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान वज्रपात तथा बारिश के कारण मकान गिरने इत्यादि वर्षाजनित हादसों में कुल 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हो गई.भगवान श्री कृष्ण के बांके बिहारी रूप और बाल लीलाओं के लिए विख्यात मथुरा जिले के वृंदावन में लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं. इसी वृंदावन में एक ऐसी जगह भी मौजूद है जिसको लेकर मान्यता है कि वहां हर रात भगवान  श्री कृष्ण और राधा रास रचाने आते हैं.निधिवन के नाम से पहचानी जाने वाली इस जगह को लेकर कई ऐसी मान्याताऐं हैं, जिन पर विश्वास करना कठिन है. जानिए निधिवन की मान्यताओं और उससे जुड़ी रोचक कहानियों के बारे में.निधिवन में मौजूद पंडित और महंत बताते हैं कि हर रात भगवान  श्री कृष्ण के कक्ष में उनका बिस्तर सजाया जाता है, दातून और पानी का लोटा रखा जाता हैं. जब सुबह मंगला आरती के लिए पंडित उस कक्ष को खोलते हैं तो लोटे का पानी खाली, दातून गिली, पान खाया हुआ और कमरे का सामान बिखरा हुआ मिलता है. पौराणिक मान्यता है कि निधिवन बंद होने के बाद भी यदि कोई छिपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह पागल हो जाता हैं. मंदिर के महंत और आसपास के लोग इससे जुड़े कई किस्से सुनाते हैं. दावा ये भी किया जाता है कि वहां मौजूद पशु-पक्षी भी शाम होते ही, वन छोड़ देते हैं.निधिवन में मौजूद पेड़ भी अपनी तरह के बेहद खास हैं. जहां आमतौर पर पेड़ों की  शाखाएं ऊपर की और बढ़ती है, वहीं निधि वन में मौजूद पेड़ों की शाखाएं नीचे की और बढ़ती हैं बढ़ती हैं. इन पेड़ों की स्थि‍त ऐसी है कि रास्ता बनाने के लिए उनकी शाखाओं को डंडों के सहारे फैलने सो रोका गया हैं.ऐसी मान्यता है कि जो रात में होने वाले भगवान श्री कृष्ण और राधा के रास को देख लेता है वो पागल या अंधा हो जाता हैं. इसी कारण निधिवन के आसपास मौजूद घरों में लोगों ने उस तरफ खिड़कियां नहीं लगाई हैं.
कई लोगों ने अपनी खिड़कियों को ईंटों से बंद करा दिया है. आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक शाम सात बजे के बाद कोई इस वन की तरफ नहीं देखता.निधिवन में ही ठा. बिहारी जी महाराज का दर्शन स्थल हैं. मान्यता है कि संगीत सम्राट और धुरपद के जनक स्वामी हरिदास भजन गाया करते थे. माना जाता है कि बांके बिहारी जी ने उनकी भक्ति संगीत से प्रसन्न होकर एक सपना दिया. सपने में कहा कि मैं तुम्हारी साधना स्थल में ही विशाखा कुंड के पास जमीन में छिपा हूं. सपने के बाद हरिदास जी ने अपने शिष्यों की मदद से बिहारी जी को निकलवाया और मंदिर की स्थापना की.

Friday, August 31, 2018

35 ए पर क्या कहती हैं जम्मू-कश्मीर की पार्टियां?

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए की क़ानूनी मान्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के ख़िलाफ़ भारत प्रशासित कश्मीर में बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
अलगावादियों ने गुरुवार और शुक्रवार को कश्मीर बंद बुलाया है. अलगावादियों के बंद के आह्वान का समर्थन यहां के कई व्यापारिक संगठनों ने भी किया है.
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अनुच्छेद 35ए पर सुनवाई होनी है.
अलगावादियों से लेकर मुख्यधारा के कई राजनीतिक दल अनुच्छेद 35ए के ख़िलाफ़ किसी भी छेड़छाड़ को लेकर एकजुट हो रहे हैं.
अनुच्छेद 35ए के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हासिल है. इसके तहत जम्मू-कश्मीर से बाहर का कोई भी व्यक्ति यहाँ जायदाद नहीं ख़रीद सकता है.
जम्मू कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर कहते हैं कि कुछ ऐसी ताक़तें हैं जो भारत और जम्मू -कश्मीर के रिश्ते कमज़ोर करना चाहती हैं.
गुलाम अहमद मीर कहते हैं, "पहले बहुत कम लोग समझते थे. लेकिन बीते छह महीनों से जब से अनुच्छेद 35 ए चर्चा में आया है, हिंदुस्तान के एक-एक बच्चे में ख़ासकर कश्मीर के बच्चों में एक जागृति आई है. 1927 में महाराजा अनुच्छेद 35ए को वजूद में लाए. 35ए को 1954 में पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में हमारी सरकार ने भारतीय संविधान के ज़रिए धारा 370 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए किया. अब जो लोग सुप्रीम कोर्ट तक जा रहे हैं, हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है. इस देश में लोकतंत्र है और किसी को भी अपनी बात रखने का अधिकार है. लेकिन हमें उम्मीद और विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट बहुत गहराई से इस मुद्दे को देखेगा."
मीर का कहना है कि जिस समय इस मुद्दे को उठाया गया है उनकी पार्टी उसमें सियासत देखती है. क्योंकि बीजेपी पूरे देश में एक नारा लेकर चली थी कि जब वे सत्ता में आएंगे तो जम्मू कश्मीर में धारा 370 को खत्म करेंगे.
मीर कहते हैं, "2014 में भी बीजेपी ने इस मुद्दे को देश के सामने रखा और वोट हासिल किए. जम्मू-कश्मीर में तीन साल तक जब तक सरकार में थे, तब इस मुद्दे को वे उठा नहीं सकते थे. अब किसी संस्था या एनजीओ का सहारा लेकर इस मुद्दे को किसी तरह 2019 के चुनाव तक चर्चा में रखना चाहते हैं."
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मुस्तफ़ा कमाल का कहना है कि उनकी पार्टी हर हाल में अनुच्छेद 35ए से छेड़छाड़ के ख़िलाफ़ लड़ेगी.
वह कहते हैं, "नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में आम जनता को अनुच्छेत 35 ए पर जागरूक किया है. लोग अब जान गए हैं और इसीलिए जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं. फिर चाहे वो जम्मू का क्षेत्र हो या लद्दाख का. दूसरे, क़ानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पार्टी के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने भारत के मशहूर क़ानूनविदों को चुना है. केंद्र की भाजपा सरकार इस मुद्दे को आने वाले चुनाव में इस्तेमाल करने की मंशा रखती है, लेकिन हमें सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास है और सच्चाई सामने आएगी."
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी का कहना है कि उनकी पार्टी चाहती है कि न सिर्फ़ याचिका को टाला जाए बल्कि याचिका को सिरे से ही ख़ारिज कर दिया जाए.
पीडीपी के प्रवक्ता रफ़ी अहमद मीर कहते हैं, "जब हम सरकार में थे तो उस समय भी हमने अनुच्छेद 35ए के ख़िलाफ़ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो इसके लिए भरपूर कोशिश की. आज भी हम वह कोशिश कर रहे हैं. हमने अनुच्छेद 35 ए के समर्थन में में प्रदर्शन भी किए. हमारी पार्टी के सभी वकील इस समय दिल्ली में हैं और अनुच्छेद 35ए की छेड़छाड़ के ख़िलाफ़ कल सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहेंगे. हम चाहते हैं कि ये जो हमारे सर पर लटकती तलवार है वह हमेशा हमेशा के लिए हट जाए."
दूसरी तरफ़, अलगावादियों का कहना है कि अगर अनुच्छेद 35ए के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गई तो वह पूरे राज्य में जनआंदोलन छेड़ेंगे.
अलगाववादी नेता सईद अली शाह गिलानी, मीरवाइज़ मौलवी उमर फ़ारूक़ और यासीन मालिक ने कई बार इस बात का दोहराया है कि अनुच्छेद 35ए के साथ छेड़छाड़ दरअसल आरएसएस और बीजेपी का मंसूबा है जो जम्मू कश्मीर की डेमोग्राफी को बदलना चाहते हैं.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) के स्टेट सेक्रेटरी मोहमद यूसुफ तारिगामी कहते हैं कि अगर अनुच्छेद 35ए के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गई तो उसके नतीजे बुहत ख़तरनाक हो सकते हैं.
निर्दलीय विधायक और आवामी इतिहाद पार्टी के प्रमुख इंजीनियर रशीद ने कहा कि वह केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि इस याचिका को ख़ारिज करें और उसके बाद कश्मीर मुद्दे पर बात करें.
वहीं, जम्मू कश्मीर बीजेपी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फ़ैसला होगा वह उन्हें क़बूल होगा. पार्टी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी अशोक कौल कहते हैं, "हमने पहले भी कहा है और आज भी कह रहे हैं कि जो भी फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट का होगा, हमें वह क़बूल होगा."
साल 2014 में दिल्ली के एक गैर सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाख़िल कर अनुच्छेद 35ए को क़ानूनी चुनौती दी थी.
इस समय जम्मू-कश्मीर में राजपाल शासन है. कुछ ही दिन पहले ही जम्मू कश्मीर में नए राज्यपाल सत्यपाल मालिक की नियुक्ति हुई है.

Wednesday, August 29, 2018

चाचा को सब पसंद करते थे लेकिन मैं नहीं

चाचा अक्सर हमारे घर आते थे. बहुत हंसमुख और मिलनसार किस्म के थे वो. कभी बच्चों के लिए संतरे लाते तो कभी बेकरी वाले बिस्किट. सभी लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन मुझे वो रत्ती भर भी पसंद नहीं थे.'
'वो मुझे देखते ही गोद में उठा लेते और चूमने की कोशिश करते. अपनी खुरदरी-सी दाढ़ी मेरे चेहरे पर रगड़ने लगते और मुझे तब तक गोदी से नहीं उतारते जब तक मैं उन्हें जोर का चांटा न मार दूं, या नाखून न लगा दूं.'
23 साल की रचिता ये बातें बताते हुए घृणा और ग़ुस्से से भर उठती हैं. उनके साथ ये हादसा तब हुआ जब वो सात-आठ साल की थीं.
यौन शोषण के मामलों में एक बड़ा हिस्सा वो होता है जिसमें अपराधी पीड़िता का क़रीबी होता है. ऐसे हालात में न तो जुर्म की शिकायत आसानी से हो पाती है और न इनकी सुनवाई या फ़ैसला.
लेकिन क्या वाक़ई ज़ुर्म की शिकायत या सुनवाई इतनी मुश्किल है? उस औरत पर क्या बीतती होगी जिसका अपना ही उसका उत्पीड़न करता है? ऐसी स्थिति में कहां जाएं? किससे मदद मांगें?
इन्हीं सवालों को ध्यान में रखते हुए बीबीसी हिंदी एक ख़ास सिरीज़ शुरू करने जा रहा है. इस दौरान महिलाएं और लड़कियां अपने अनुभव साझा करेंगी. इसके साथ ही हम महिलाओं के क़ानूनी अधिकारों और उन्हें मिल सकने वाली मदद के बारे में बात करते हुए इससे जुड़े तमाम मसलों पर रोशनी डालेंगे.
आने वाले दिनों में इससे भी भयावह अनुभव वाली रिपोर्ट आप हमारी वेबसाइट चिता बताती हैं, "आख़िर एक दिन मैंने हिचकिचाते हुए मम्मी से कह ही दिया. मैंने कहा कि गौरव चाचा अपनी दाढ़ी मेरे चेहरे पर रगड़ते हैं तो मुझे बहुत बुरा लगता है. मम्मी ने पूछा, कुछ और तो नहीं किया? मैंने ना में सिर हिलाया."वो कहती हैं, "उस दिन के बाद से उन्होंने गौरव चाचा को मुझ तक पहुंचने ही नहीं दिया. उनके आते ही मुझे दूसरे कमरे में बिठा देतीं और पूछने पर कहतीं कि पढ़ाई कर रही है या खेलने गई है."
वह अब इस बात को लगभग भूल गई हैं, लेकिन जब भी यौन उत्पीड़न या इससे मिलते-जुलते शब्द सुनती हैं तो ज़ेहन में ये बातें उभरकर ज़रूर आ जाती हैं.
यह कहानी अकेले रचिता की नहीं है. आंकड़ों पर गौर करें तो यौन उत्पीड़न के अधिकतर मामले ऐसे होते हैं जिसमें अपराधी या तो पीड़ित के परिवार का सदस्य होता है या कोई रिश्तेदार या फिर कोई जानने वाला.
हालांकि रचिता ख़ुशक़िस्मत थीं कि उनके घरवालों ने उनकी बात समझी, लेकिन ऐसी मदद और सहानुभूति बहुत कम लोगों को ही मिल पाती है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड् ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2015 में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के कुल 3,27,394 मामले दर्ज किए गए. इनमें रेप के 34, 651 मामले थे और 33,098 मामलों में अपराधी पीड़िता का जानने वाला था.
महिलाओं के लिए काम करने वाले एनजीओ 'ब्रेकथ्रू' की सीनियर मैनेजर पॉलिन गोमेज कहती हैं,''हमने ऐसे मामले देखे हैं जहां दामाद ने सास का यौन उत्पीड़न किया, भाई ने बहन का, पिता ने बेटी का या फिर दादा ने पोती का.''
अगर ऐसा हो तो क्या करना चाहिए?
इस सवाल के जवाब में पॉलिन कहती हैं, "अपनी बात तब तक कहते रहिए जब तक कोई सुन न ले, कोई प्रतिक्रिया न दे दे."
वो कहती हैं, "कई लोगों से कहिए. स्कूल-कॉलेज में कहिए. पुलिस या मजिस्ट्रेट के पास जाइए. किसी एनजीओ की मदद लीजिए, हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल कीजिए. कुछ भी कीजिए, लेकिन चुप मत बैठिए."
सेंटर फ़ॉर रिहैबिलिटेशन ऐंड डेवलपमेंट में क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट डॉ. श्रावस्ती वेंकटेश कहती हैं, "यौन शोषण के पीड़ितों में ग़ुस्सा, ग्लानि और निराशा का भाव होता है. मदद न मिलने पर यह और बढ़ जाता है."
वो कहती हैं, "कई बार पीड़ित घटना के सालों बाद भी उससे पूरी तरह उबर नहीं पाता. ऐसे में काउंसलिंग बहुत मददगार साबित होती है."
पॉलिन गोमेज़ कहती हैं, ''कई बार लोग जुर्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना चाहते हैं, लेकिन क़ानून और बाक़ी चीजों की सही जानकारी न होने की वजह से ख़ामोश रहकर तकलीफ़ें झेलते रहते हैं. यह स्थिति बहुत ही भयावह है.